संकल्प शक्ति से परिवर्तन
यह संकल्प हृदय की ओर देखते हुए करो। मानो परमात्मा हृदय में ही बैठे हुए हैं और हम भक्तिभाव से परमात्मा से बातचीत कर रहे हैं। इन संकल्पों से शरीर पर अद्भुत परिणाम दिखाई देंगे। रोगी भी निरोग होंगे, क्रोधी भी शांत होंगे और कामी भी ब्रह्मचारी होंगे। इस निश्चय को पूर्ण सत्य जानो। परंतु दृष्टि हृदय पर लगी होनी चाहिए और परमात्मा को हृदयस्थ समझकर उसे संबोधित कर संकल्प करना चाहिए।
💠. हे परमात्मन्! आप प्रेमस्वरूप, शान्तिस्वरूप, क्षमास्वरूप हो। इस दास के नस-नस में प्रेम का, शांति का तथा क्षमा का संचार हो रहा है; उनकी सनसनाहट का अनुभव कर रहा हूँ। ॐ।
💠 भगवान! आपके पास दुःख, रोग, चिंता, भीति, दरिद्रता कहाँ? आप सदा-सर्वदा सुखी, निरोगी, निश्चिन्त, निर्भय, लक्ष्मीपति हो। सुख-समृद्धि, शांति, आरोग्य, निर्भयता आदि मुझमें संचार कर रहे हैं, ऐसा मेरा दृढ़ विश्वास है। पहले से मैं अधिक स्वस्थ हूँ, अधिक निर्भय हूँ, अधिक शान्ति हूँ, निर्विकार हूँ। ॐ।
💠 आज रात्रि में स्वप्न-दोष नहीं होगा। मैं बहुत जल्द दुरुस्त हूँगा। भगवान मुझे सम्भालो। वीर्यनाश होने के पहले ही मेरी आँखें खोल दो, मुझे जागृत कर दो। अब मैं किसी से नहीं डरूँगा क्योंकि मेरे रक्षक प्रभु हैं। ॐ।
💠 वृत्तियाँ अब दिन-ब-दिन पवित्र हो रही हैं, दृष्टि में प्रत्येक स्त्री के लिए मातृभाव समाया है, कानों में ब्रह्मचारियों का यश गूँज रहा है। मैं अब ब्रह्मचर्य का पालन कर रहा हूँ, मेरा उद्धार हो रहा है। ॐ।
💠प्रभो, मैं तेरा हूँ और तू मेरा है।
“अब करुणा कर कीजिए सोई!
जा विधि मोर परम हित होई।”
त्राहिमाम्! त्राहिमाम्!! त्राहिमाम्!!!
इस प्रकार रोज प्रातःकाल, सायंकाल, और भोजन के समय ऐसे केवल तीन ही बार यदि विश्वास और दृढ़ता के साथ हम संकल्प करेंगे तो अपार कल्याण होगा। महापुरुष कहते हैं।