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❣Bhakti & motivation❣
14 de mai. de 2026, 22:39
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सूर्य और चंद्र ग्रहण एक ख़ौगोलिक प्रक्रिया हैं जो हमेशा से होते आ रहे हैं और ऐसे ही आते भी रहेंगे भविष्य में।
महत्वपूर्ण ये है कि हम सनातनी हैं हमारा धर्म और संस्कार एक मजबूत वैज्ञानिक धरातल पर आधारित हैं।
तो डर कैसा?
डरें नहीं, इष्ट पर विश्वास करें!
हम केवल ग्रह नक्षत्रों की चाल और गणना नहीं देखते, हम समस्या नहीं समाधान पर आधारित संस्कृति हैं, स्थितियां कितनी भी विपरीत क्यों न हों......पुण्य भारत भूमि पर देव कृपा है हम हर परिस्थिति में विजयी ही रहेंगे।
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14 de mai. de 2026, 22:39
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मुझे तोड़ लेना वनमाली!
उस पथ पर देना तुम फेंक,
मातृभूमि पर शीश चढ़ाने
जिस पथ जावें वीर अनेक
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14 de mai. de 2026, 22:39
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चंद्र ग्रहण -सिंह राशि/ पूर्वा फाल्गुनि नक्षत्र📌
#चंद्रग्रहण
वैसे तो ग्रहण का नक्षत्र,मास, दिन, वार, अयन, ग्रहण काल में योग, सूर्य/चंद्र पर अन्य ग्रहों की दृष्टि, ग्रहण काल में सूर्य/चंद्र का वर्ण आदि अनेकों स्थितियों का प्रभाव देखा जाता है, और हमारे गुरुओं/ ऋषियों के अनुसंधान से प्राप्त ये तथ्य सटीक भी हैं।
पर आम जन के लिए जन्म/चंद्र राशि के अनुसार ग्रहण की राशि पर पोस्ट कर रही हूँ।
मैंने जो औषधि स्नान लिखा था आशा करती हूं आप वो व्यवस्था कर पाए हैं अगर नहीं तो ग्रहण उपरांत गंगाजल डाल कर ही स्नान करें।
इष्ट /कुल देवता/देवी का ध्यान करें।
चंद्रमा से सम्बन्धित दान करें।
चंद्रमा के स्तोत्र आदि का पाठ करें।
अपने लग्नेश को बल दें, लग्न/लग्नेश बली और शुभकारी हो तो ग्रह जनित आधी समस्याओं का समाधान स्वयं ही मिलता रहता है।
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14 de mai. de 2026, 22:39
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ग्रहण पुण्यकाल📌
स्नान, जप होम, दान आदि का क्रम
ग्रहणारम्भ में स्नान कर ग्रहण मध्य में जप-होमादि तथा ग्रहणान्त में मोक्ष स्नान करके दान आदि देना चाहिए। ग्रहण के मोक्ष काल में जो व्यक्ति स्नान नहीं करता है वह अगले ग्रहण तक सूतकी होता है।
ग्रहणकालिक यह स्नान अमन्त्रक ही होता है। जाबालि ने इस प्रसंग में कहा है कि चक्षु, शिर, कर्ण, एवं कफ रोग से ग्रसित व्यक्ति को कण्ठ से ही स्नान करना चाहिए। यहाँ ग्रहणजन्य पुण्यकाल केवल ग्रहणारम्भ से ग्रहणान्त तक ही होता है।
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14 de mai. de 2026, 22:39
चरण स्पर्श का महत्व📌
एक माह तक नियम बनाए कि आप जिस भी अपने से बड़े और हृदय से सम्माननीय, संबंधों में बड़े या धर्म समाज में स्थान रखने वालों से मिलेंगे तो उनके चरण स्पर्श करेंगे।
और घुटने नहीं छूने है या तो विधिवत् हाथ क्रॉस करके अन्यथा पूर्णतः झुक कर नमस्कार करें, स्त्रियों में मातृभाव का दर्शन करेंगे।
ऐसा बस तब नहीं करना है जबकि आप संध्या नियम आदि करते हैं फिर आपको उसकी मर्यादा का पालन करना है।
आप एक परिवर्तन देखेंगे स्वयं में, और इस से मिलने वाले लाभ भी अनुभव कर सकेंगे।
क्या कभी आपने ऐसा अनुभव किया है कि कोई व्यक्ति जो आपकों पसंद नहीं फिर भी जब वो आपको चरण वंदन करता है तो उस क्षण के लिए अनायास ही आपके मुख से आशीर्वचन निकलते ही हैं।
ग्रह दशाओं के अनुसार भी मैने इस प्रकार के कुछ प्रयोग किए हैं जिनके परिणाम काफी विस्मित करने वाले और असरदार रहे, पर यहां उनका वर्णन सही नहीं होगा.....वे विशेष रूप से ही प्रयोग हों यही उत्तम है।
पर आप अपने से बड़ों को चरण वंदन करें, माताओं को जाति समाज से ऊपर उठ कर प्रणाम करें/ या हृदय से थोड़ा झुकते हुए नमन करें।
गुरु, सूर्य और राहु (कुछ स्थितियों में)की दशा या अंतर व प्रभाव वाले व्यक्तियों को अवश्य ही ऐसा करने में दिक्कत होगी, अंतर्मन को समझाना होगा....पर प्रयास करें।
कई समस्याओं का समाधान है इस छोटी सी आदत में।
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14 de mai. de 2026, 22:39
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आशा करती हूं आप लोगों ने ये उपाय शुरू किए होंगे, मैं पिछले कई महीनों से लिख रही हूं कि पैसे के अनावश्यक और दिखावे के लिए व्यय को सीमित करें, मूल आवश्यकताओं के अतिरिक्त अनावश्यक व्यय न करें।
रोज मेडिटेशन करें, इष्ट का, कुलदेवी का ध्यान करें।
महादेव को नियमित जल चढ़ाएं।
नित्य अपने घर के पास किसी भी मंदिर में 2 मिनट के लिए ही पर अवश्य जाएं।
परिवार के साथ समय व्यतीत करें।
हनुमान चालीसा, सुन्दरकाण्ड, देवी चालीसा और स्तुतियों को नित्य नियम बनाएं।
भ्रामरी, नाड़ी शोधन प्राणायाम और योग करें।
रोज शरीर को कुछ स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज करने की आदत डालें।
सूर्य नमस्कार करें, सूर्य को अर्घ्य दें।
ये आदतें डालें, 1 सप्ताह तक कुछ दिक्कत होगी, पर एक माह में आपके शरीर को इसकी आदत हो जाएगी और ये आपका रूटीन बन जाएगा।
ज्योतिष उपाय बड़े बड़े होम यज्ञ ही नहीं होते बल्कि नित्य नियम में शरीर और ब्रह्मांड की ऊर्जा को जोड़ने के ये छोटे छोटे उपाय भी बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाते हैं।
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14 de mai. de 2026, 22:39
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प्रार्थना आपकी आदत होनी चाहिए ना की मुश्किल वक्त का सहारा !!
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14 de mai. de 2026, 22:39
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जिस व्यक्ति में लालच और भय नही,
वह किसी का भी गुलाम नहीं बन सकता..!
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14 de mai. de 2026, 22:39
फुलेरा दूज 📌
अबूझ मुहूर्त
इस द्वितीया चंद्र दर्शन का विशेष महत्व है
वैसे तो हर मास की शुक्ल द्वितीया को मैं चंद्रदर्शन करने के लिए पोस्ट डालती हूं, पर इस बार ये विशेष है क्योंकि वर्ष में केवल एक बार आने वाला अबूझ मुहूर्त फुलेरा दूज है और इस दिन के चन्द्र दर्शन बहुत शुभ कहे जाते हैं।
होली की रात्रि भी चार माह रात्रियों में एक कही जाती है और इसका नाम दारूणा है, होलाष्टक से शीतला अष्टमी (बसौरा) तक का समय बहुत दारुण माना जाता है, इस बीच आपने सुना होगा कि सभी शुभ कार्य वर्जित होते हैं।
विवाह की पहली होली पर घर आई लड़कियों को बसोरा से पहले विदा भी नहीं किया जाता है।
आज से उत्तर भारत में गाय के गोबर का चौक बनाया जाता है और उस चौक को फूलों से सजाते हैं चौक पर शुभ शगुन के चंद्रमा सूरज और अन्य चिन्ह बनाए जाते हैं।
तर्जनी पर आटा रख कर विशेष रूप से दुगियां बनाने का प्रचलन है कई जगह, अभी तो नहीं पता पर द्वितीया पर दुगियां ऐसे ही तो नहीं बननी शुरू हुई होंगी?
पहाड़ों में तो होली के गीत संगीत बहुत पहले से शुरू हो गए हैं पर आज से हर घर में कुछ न कुछ गीत संगीत का कार्यक्रम संध्या/रात्रि काल में होना ही चाहिए। जिसमें आप होली के भजन/गीत/संगीत का कार्यक्रम करें।
ये एक ज्योतिषीय उपचार भी है सबके लिए इसके विषय में भी लिखूंगी जल्दी।
हर मास की शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि पर चंद्र दर्शन अत्यंत शुभ कहे जाते हैं। "हलाहल" विष के तीव्र व तीक्ष्ण दाह को शांत करने के लिए ही महादेव ने द्वितीया के शीतल बालचंद्र को मस्तक पर धारण किया था।
इस दिन चंद्रमा से अमृत का स्राव होता है जिसको आत्मा रूपी "सूर्य" ग्रहण करता है। शिवजी ने द्वितीया के चंद्रमा को ही मस्तक पर धारण किया हुआ है।
चन्द्रमा चराचर जगत की माता है, मन और भावनाओं पर अधिकार रखने वाला चंद्र साक्षात (माँ) भगवती पार्वती है और आत्मा और विवेक का कारक "सूर्य" ही (पिता) शिव हैं।
द्वितीया का चंद्र दर्शन सुख सौभाग्य कारक कहा गया है और मातेश्वरी और महादेव की कृपादृष्टि प्राप्त कराता है।
चंद्रमाकृत दोषों से पीड़ित होने पर भी द्वितीया के चंद्रमा का लगातार दर्शन लाभ दायक होता है।
चन्द्र दर्शन के समय चन्द्रमा के पौराणिक मंत्र पढ़ सकें तो और भी शुभ है।
श्वेताम्बरः श्वेतविभूषणश्च
श्वेतद्युतिर्दण्डधरो द्विबाहुः ।
चन्द्रोऽमृतात्मा वरदः
किरीटी मयि प्रसादं विदधातु देवः ।।
आगे से ध्यान रखें, द्वितीया को चंद्र बहुत कम समय तक दिखता है तो समय पर दर्शन जरूर करें।
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14 de mai. de 2026, 22:39
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Astrology & Remedies
🚨सभी के लिए और अतिआवश्यक उपाय🚨
कल से आगे आने वाली अमावस्या तक कम से कम 11 बार हनुमान चालीसा का नित्य पाठ करें।
ये उपाय सभी करें, राम नाम कीर्तन का सम्पुट लगाकर करें तो और भी सुन्दर, अगर राम रामरक्षास्तोत्र कर सकें तो प्रभु कृपा मानें।
जगह जगह आप ग्रहों से सम्बन्धित बहुत सारी जानकारियों को पा रहे होंगे, कुछ समझा कर तो कुछ डराकर स्थितियों को आपके सामने रख रहे होंगे.....पर अगर आप धर्म को मानने वाले हैं, ईश्वर पर आस्था रखते हैं या कुलदेवी देवता को याद करते हैं तो धर्म कहें या इष्ट......वो हमारी सुरक्षा का एक मार्ग हमको दिखा ही देता है।
ये पोस्ट लिखना भी शायद उसी प्रेरणा के कारण है
ग्रह सदैव चलायमान रहते हैं इसलिए नक्षत्रों व उनमें निहित तारों में इन ग्रहों के गोचरवश पृथ्वी पर आने वाली ऊर्जा का प्रभाव भी उनके हमारी कुंडली में स्थिति के अनुसार शुभ, अशुभ, सूक्ष्म या तीव्र पड़ना तय ही है।
ये उपाय करें, डरें नहीं अपने इष्ट पर विश्वास करें, आपको लाभ होगा, इसमें कोई संशय नहीं है।