कई लोग कहते हैं “2 साल हो गए, कुछ खास कमाई नहीं हुई ” और यहीं से गलती की शुरुआत होती है। लोगों को लगता है कि बाज़ार हर साल पैसा देगा, जैसे कोई गारंटी हो, लेकिन असलियत ये है कि बाज़ार ऐसा काम नहीं करता। अगर कोई 20-25 साल से निवेश कर रहा है तो शुरुआती कई साल उसे भी कुछ खास नतीजे नहीं दिखे होंगे, बल्कि कई बार ये भी लगा होगा कि सही कर रहा हूँ या नहीं। लेकिन फिर अचानक कुछ ऐसे साल आते हैं जब पूरा खेल बदल जाता है, जैसे 2004 से 2008 का दौर, फिर 2010-11, उसके बाद 2014 से 2017 और हाल के सालों में 2020 से 2023 यहीं पर असली wealth बनती है, लेकिन सिर्फ उन्हीं के लिए जो बीच के शांत समय में भी टिके रहते हैं।
असल में बाज़ार का सबसे बड़ा धोखा यही है कि वो हर समय exciting नहीं होता। बीच-बीच में लंबे ऐसे phase आते हैं जहाँ returns मामूली होते हैं या portfolio वहीं का वहीं लगता है। इसी समय ज़्यादातर लोग हार मान लेते हैं, strategy बदलते रहते हैं या पूरी तरह बाहर निकल जाते हैं। लेकिन सच्चाई ये है कि ये “slow years” बेकार नहीं होते, यही वो समय होता है जहाँ discipline बनता है, गलतियों से सीख मिलती है और धैर्य की असली परीक्षा होती है। जो लोग इस समय को झेल लेते हैं, वही आगे आने वाले अच्छे दौर का फायदा उठा पाते हैं।
बाज़ार हमेशा cycles में चलता है, कभी तेजी, कभी ठहराव और कभी गिरावट। जो लोग हर साल profit ढूंढते हैं, वो अक्सर frustration में फैसले लेते हैं, जबकि जो लोग लंबे समय का नजरिया रखते हैं, वो समझते हैं कि पैसा “हर साल” नहीं बल्कि “सही समय” पर बनता है। इसलिए असली फर्क knowledge से ज्यादा behavior बनाता है,
कौन कितना समय तक बिना घबराए invested रह सकता है।
Wealth लगातार नहीं बनती, बल्कि कुछ चुनिंदा phases में बनती है, और उन phases तक पहुँचने के लिए आपको पूरे सफर में टिके रहना पड़ता है। कोई shortcut नहीं है, कोई जादुई formula नहीं है, बस एक ही strategy है जो बार-बार काम करती है हर हाल में बाज़ार में बने रहना, क्योंकि जब मौके आते हैं तो वो अचानक आते हैं, और तब सिर्फ वही लोग तैयार होते हैं जो बीच के मुश्किल समय में भी डटे रहते हैं।
Wealth creation partner
Pro: Satish Kumar - MFD
10 Years+ Experience in capital market
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